वन्दौं श्रीराधाचरण, पावन परम उदार।
भय विषाद अज्ञान हर, प्रेम भक्ति दातार॥
- श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (6)
मैं उन पावन और परम उदार श्री राधा के चरणों का वंदन करता हूँ, जो समस्त भय, संताप और अविद्या का नाश कर जीव को विशुद्ध प्रेम-भक्ति का दान देते हैं।
भय विषाद अज्ञान हर, प्रेम भक्ति दातार॥
- श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (6)
मैं उन पावन और परम उदार श्री राधा के चरणों का वंदन करता हूँ, जो समस्त भय, संताप और अविद्या का नाश कर जीव को विशुद्ध प्रेम-भक्ति का दान देते हैं।

