तत्र स्नात्वा च पीत्वा च माथुरं लभते फलम् ।
अथाऽत्र मुञ्चते प्राणान्मम लोकं स गच्छति ।।
- वराहपुराण, मथुरा महात्म (154.34)
जो ब्रज में स्नान, यहाँ का निर्मल जन पान करते हैं वह उत्तम फल प्राप्त करते हैं । यहाँ प्राण त्यागने से मेरे लोक की प्राप्ति होती है ।
अथाऽत्र मुञ्चते प्राणान्मम लोकं स गच्छति ।।
- वराहपुराण, मथुरा महात्म (154.34)
जो ब्रज में स्नान, यहाँ का निर्मल जन पान करते हैं वह उत्तम फल प्राप्त करते हैं । यहाँ प्राण त्यागने से मेरे लोक की प्राप्ति होती है ।

