(सवैया)
श्री नँदनंदजू आनंद कंद जू, श्री व्रजचंद विहारी की जै जै। [1]
नव घनश्याम जू अति अभिराम जू, मन मद मत्त प्रहारी की जै जै॥ [2]
गज गति गामिनी प्रीतम भामिनी, गोपिन प्रान पियारी की जै जै। [3]
नव रसखान दया की निधान, श्रीवृषभानु दुलारी की जै जै॥ [4]
- श्री रसखान, रसखान रत्नावली
श्री नंदनंदन जी, जो आनंद के स्रोत हैं और व्रजचंद्र के रूप में विहार करने वाले हैं, उनकी जय-जयकार हो। [1]
श्री नँदनंदजू आनंद कंद जू, श्री व्रजचंद विहारी की जै जै। [1]
नव घनश्याम जू अति अभिराम जू, मन मद मत्त प्रहारी की जै जै॥ [2]
गज गति गामिनी प्रीतम भामिनी, गोपिन प्रान पियारी की जै जै। [3]
नव रसखान दया की निधान, श्रीवृषभानु दुलारी की जै जै॥ [4]
- श्री रसखान, रसखान रत्नावली
श्री नंदनंदन जी, जो आनंद के स्रोत हैं और व्रजचंद्र के रूप में विहार करने वाले हैं, उनकी जय-जयकार हो। [1]
वे नव-मेघ जैसे श्याम, अत्यंत सुंदर और मन को मोहित करने वाले हैं, जो कामदेव को भी जीत लेते हैं—उनकी जय हो। [2]
जो गजगामिनी (हाथी जैसी मृदुल चाल वाली) प्रीतम लाल जी की भामिनी श्री राधा हैं, जो गोपियों के प्राणों की प्यारी हैं— उनकी भी जय हो। [3]
नव नवायमान रस की खान एवं दया की निधान, वृषभानु दुलारी श्री राधा की सदा ही जय हो। [4]
जो गजगामिनी (हाथी जैसी मृदुल चाल वाली) प्रीतम लाल जी की भामिनी श्री राधा हैं, जो गोपियों के प्राणों की प्यारी हैं— उनकी भी जय हो। [3]
नव नवायमान रस की खान एवं दया की निधान, वृषभानु दुलारी श्री राधा की सदा ही जय हो। [4]

