जय जय वृषभानु नंदिनी, जय जय ब्रज राज कुमार।
शरण गहे निज राखिये, सब अपराध बिसार॥
- ब्रज के दोहे
श्री वृषभानुनन्दिनी राधा और श्री ब्रजराजकुमार कृष्ण की जय हो। कृपया मेरे सभी अपराधों को भुलाकर मुझे अपनी निज शरण में रखिए।
शरण गहे निज राखिये, सब अपराध बिसार॥
- ब्रज के दोहे
श्री वृषभानुनन्दिनी राधा और श्री ब्रजराजकुमार कृष्ण की जय हो। कृपया मेरे सभी अपराधों को भुलाकर मुझे अपनी निज शरण में रखिए।

