भूत छिये मदिरा पिये, सब काहु सुद्धि होय।
प्रेम सुधा रस जो पिये, तेहि सुद्धि कबहु न होय॥
- श्री रसखान, रसखान रत्नावली
चाहे कोई प्रेत-बाधा से ग्रस्त हो या मदिरा के नशे में चूर हो, समय बीतने पर उसकी सुध-बुध वापस आ जाती है। परंतु जिसने एक बार श्री राधा कृष्ण के 'प्रेम-सुधा-रस' का आस्वादन कर लिया, उसे फिर इस संसार की सुध कभी नहीं आती। वह सदा के लिए भगवद-प्रेम की मस्ती में खो जाता है।
प्रेम सुधा रस जो पिये, तेहि सुद्धि कबहु न होय॥
- श्री रसखान, रसखान रत्नावली
चाहे कोई प्रेत-बाधा से ग्रस्त हो या मदिरा के नशे में चूर हो, समय बीतने पर उसकी सुध-बुध वापस आ जाती है। परंतु जिसने एक बार श्री राधा कृष्ण के 'प्रेम-सुधा-रस' का आस्वादन कर लिया, उसे फिर इस संसार की सुध कभी नहीं आती। वह सदा के लिए भगवद-प्रेम की मस्ती में खो जाता है।

