सुर तेतिसै कोटि की कौन गिने, जँह ब्रह्म रह्यो लपटायन में।

सुर तेतिसै कोटि की कौन गिने, जँह ब्रह्म रह्यो लपटायन में।

सुर तेतिसै कोटि की कौन गिने, जँह ब्रह्म रह्यो लपटायन में।
रहुरे मन तोसौं करों विनती वृषभानु किशोरी के पायन में।।

- श्री लालबलवीर जी

33 करोड़ देवी-देवताओं का उल्लेख कौन कर पायेगा जब निर्माता ब्रह्मा स्वयं उनके(श्री राधा के) श्री चरण कमलों के चिंतन में लीन रहते हैं ? इसलिए, हे मेरे मन, अब मैं तुमसे विनती करता हूँ, तुम सदा के लिए श्री वृषभानु दुलारी के चरणों की शरण ग्रहण करो ।"