ठाड़े मनमोहन सुन्दर यमुना - श्री सूरदास, सूर सागर

ठाड़े मनमोहन सुन्दर यमुना - श्री सूरदास, सूर सागर

(राग अडानो)
ठाड़े मनमोहन सुन्दर यमुना तीर री।
जबते दृष्टि परि या मुख पे तबते धरत न धीर री।। [1]
मृगमद तिलक अलक घुंघरारी नासा मुक्ता कीर री।
सूरदास प्रभु वेणु बजावत थक्यो सरिता नीररी।। [2]
- श्री सूरदास, सूर सागर

श्याम सुंदर यमुना किनारे विराज रहे हैं। जब से वह मेरी दृष्टि में आए हैं, तब से एक क्षण को भी मुझे धीरज नहीं मिल रहा है एवं उनसे मिलने को व्याकुलता बढ़ती ही जा रही है । [1]

उनके मस्तक पर तिलक है, घुंघरारे केश हैं, एवं नासिका तोते के समान है जिसमें मुक्ता (मोती) धारण किए हुए हैं। श्री सूरदास जी कहते हैं कि मेरे प्रभु गिरिधर लाल वेणु बजा रहे हैं जिसे सुनकर मानो सरिता थकित (रुक) हो गई है। [2]