जाकी नख दुति लखि लाजत - श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (2.5)

जाकी नख दुति लखि लाजत - श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (2.5)

जाकी नख दुति लखि लाजत, कोटि कोटि रवि चंद।
वंदो तिन राधा चरण, पंकज सुचि सुखकंद॥

- श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (2.5)

मैं श्री राधा के चरण-कमलों का बार-बार वंदन करता हूँ, जिनके चरण-नखों की दिव्य ज्योति के सामने करोड़ों-करोड़ों चंद्र और सूर्य भी लज्जित हो जाते हैं। वे चरण-कमल ही समस्त आनंद और रस के मूल आधार हैं।