जब जागै तब प्रिया भजे - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (308)

जब जागै तब प्रिया भजे - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (308)

जब जागै तब प्रिया भजे, कै सोवै पांव पसारि।
कुंज बिहारिन लाड़ली, नेकु न भूले यारि॥

- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (308)

जब तक साधक जागता रहे, तब तक उसे चाहिए कि वह डटकर प्राणप्यारी श्री किशोरी जी का भजन करे; और जब नींद आए, तब पैर फैलाकर (समस्त चिंताओं से मुक्त होकर) सो जाए। किंतु किसी भी स्थिति में अपनी एकमात्र हितैषिणी, प्राणप्यारी, परम लाड़िली निकुंज-विहारिणी श्री राधा रानी की नित्य-यारी (संबंध) को तनिक भी न भूले।