पुनः प्रसन्नेन्दुमुखेन तेजसा - श्री बिल्वमंगल, श्री कृष्ण कर्णामृतम (34)

पुनः प्रसन्नेन्दुमुखेन तेजसा - श्री बिल्वमंगल, श्री कृष्ण कर्णामृतम (34)

पुनः प्रसन्नेन्दुमुखेन तेजसा पुरोऽवतीर्णस्य कृपामहाम्बुधेः ।
तदेव लीलामुरलीरवामृतं समाधिविघ्नाय कदा नु मे भवेत् ।।

- श्री बिल्वमंगल, श्री कृष्ण कर्णामृतम (34)

हे श्रीकृष्ण! प्रसन्न चन्द्रमा के समान मुख वाले तेज से मेरे सामने पुनः प्रकट होने वाली श्रीकृष्णकृपासमुद्र की उसी लीला-मुरली की नादामृत-लहरी से कब मेरी समाधि में विघ्न होगा ?