पर्यौ रहौं नित चरन-तल, अर्यौ प्रेम-दरबार।
प्रेम मिलै मोय दुहुन के, पद-कमलनि सुखसार॥
- श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (7.4)
मैं नित्य ही आपके [युगल] चरणों तले और प्रेम-दरबार [श्रीधाम वृन्दावन] में पड़ा रहूँ। मेरी केवल एक ही आशा है कि मुझे आप दोनों [श्री राधा-कृष्ण] के सुख-सार-स्वरूप युगल-चरण-कमलों का निष्काम प्रेम प्राप्त हो।
प्रेम मिलै मोय दुहुन के, पद-कमलनि सुखसार॥
- श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (7.4)
मैं नित्य ही आपके [युगल] चरणों तले और प्रेम-दरबार [श्रीधाम वृन्दावन] में पड़ा रहूँ। मेरी केवल एक ही आशा है कि मुझे आप दोनों [श्री राधा-कृष्ण] के सुख-सार-स्वरूप युगल-चरण-कमलों का निष्काम प्रेम प्राप्त हो।

