वृषभानु कुण्ड, बरसना में स्थित है । यहाँ महाराज वृषभानु जी नित्य स्नानोपरान्त, ब्रजेश्वर महादेव की उपासना के लिए जाते थे, इसे भानोखर भी कहते हैं।
ततो वृषभानु कुण्ड स्थले प्रार्थना मन्त्र:
निर्धूतकिल्विषायैव गोपराजकृताय ते ।
वृषभानुमहाराजकृताय सरसे ।।
-ब्रज भक्ति विलास
भानु सरोवर, जो वृषभानु जी का सरोवर है उसको प्रणाम करने से और उसमें स्नान करने से कायिक, वाचिक और मानसिक किल्बिष (पाप) नष्ट हो जाते हैं। यह सरोवर वृषभानु महाराज जी के द्वारा निर्मित है । ऐसे सरोवर को हम प्रणाम करते हैं।
यह सरोवर श्री राधा और श्री कृष्ण दोनों को बहुत प्रिय है। दोनों ने विभिन्न लीलाओं से यहां जल क्रीड़ा की है।
युगल रसिक नव किशोर यहाँ रस लीला मेन तल्लीन रहते हैं । यदि आप वास्तव में जानना चाहते हैं तो भानु सरोवर के किसी एकांत स्थान पर बैठें और अपने विचारों को सीधे अनुभव करें ।
स्थान:
वृषभानु कुंड, बरसाना के पूर्व में, श्री राधारानी मंदिर, बरसाना से लगभग 1 किमी दूर स्थित है।
ततो वृषभानु कुण्ड स्थले प्रार्थना मन्त्र:
निर्धूतकिल्विषायैव गोपराजकृताय ते ।
वृषभानुमहाराजकृताय सरसे ।।
-ब्रज भक्ति विलास
भानु सरोवर, जो वृषभानु जी का सरोवर है उसको प्रणाम करने से और उसमें स्नान करने से कायिक, वाचिक और मानसिक किल्बिष (पाप) नष्ट हो जाते हैं। यह सरोवर वृषभानु महाराज जी के द्वारा निर्मित है । ऐसे सरोवर को हम प्रणाम करते हैं।
यह सरोवर श्री राधा और श्री कृष्ण दोनों को बहुत प्रिय है। दोनों ने विभिन्न लीलाओं से यहां जल क्रीड़ा की है।
युगल रसिक नव किशोर यहाँ रस लीला मेन तल्लीन रहते हैं । यदि आप वास्तव में जानना चाहते हैं तो भानु सरोवर के किसी एकांत स्थान पर बैठें और अपने विचारों को सीधे अनुभव करें ।
स्थान:
वृषभानु कुंड, बरसाना के पूर्व में, श्री राधारानी मंदिर, बरसाना से लगभग 1 किमी दूर स्थित है।

