श्री सवामन शालिग्राम मंदिर, वृंदावन

श्री सवामन शालिग्राम मंदिर, वृंदावन

स्थान:
सवामन शालिग्राम मंदिर, वृंदावन के लोई बाजार में श्री राधा श्यामसुंदर मंदिर के सामने स्थित है।

पद्मपुराण में उल्लेख है कि सतयुग में दैत्य जालंधर की पत्नी वृंदा के अभिशाप से भगवान विष्णु ने शालिग्राम शिला का रूप रखकर गंडकी नदी में निवास किया था, जो नेपाल में स्थित है। इसी गंडकी नदी से सवामन की एक शालिग्राम शिला प्राप्त हुई। जिसकी आज वृंदावन के मंदिर में विधवत रूप से पूजा-अर्चना हो रही है। मंदिर सेवायत श्रीकांत बौहरे के अनुसार, श्री वैष्णव संप्रदाय के एक महात्मा कालांतर में नेपाल के जंगल में तपस्या कर रहे थे, उन्हें स्वप्न में आदेश हुआ कि गंडकी नदी में एक विशालकाय शालिग्राम शिला विराजमान है, जिसे निकालकर वृंदावन पहुंचाना है। संत गंडकी नदी पहुंचे तो उन्हें शिला मिल गई। उन्होंने बांस की बहंगी बनाई और उसमें शिला को विराजमान करवाकर वृंदावन के लिए चल दिए। जहां शहर के मध्य बने इस मंदिर में शालिग्राम शिला को स्थापित करवाया। मान्यता है कि शालिग्राम की एक शिला अधूरी मानी जाती है, तभी मंदिर में सेवा पूजा कर रहे संत को स्वप्न आया कि हैदराबाद के सीताराम बाग में विराजमान मंदिर में एक अन्य विशालकाय शिला स्थापित है जो कि तुलसीदल न मिलने के कारण अपूर्ण है, उस शिला को वृंदावन लाकर मंदिर में विराजमान करवाया गया। इस मंदिर का निर्माण सन 1823 में सेठ गनेरीलाल ने करवाया था।