गोविंददेहतोऽभिन्नं पूर्णब्रह्मसुखाश्रयम् - पद्मपुराण, खण्डः 5 (पातालखण्डः), अध्याय 69, छंद 72

गोविंददेहतोऽभिन्नं पूर्णब्रह्मसुखाश्रयम् - पद्मपुराण, खण्डः 5 (पातालखण्डः), अध्याय 69, छंद 72

गोविंददेहतोऽभिन्नं पूर्णब्रह्मसुखाश्रयम् ।
मुक्तिस्तत्र रजःस्पर्शात्तन्माहात्म्यं किमुच्यते ।।

- पद्मपुराण, खण्डः 5 (पातालखण्डः), अध्याय 69, छंद 72
 
यह वृंदावन धाम गोविंद की चरण रेणु के स्पर्श मात्र से पवित्रता एवं दिव्य्ता से मंडित है, उनके विग्रह से अभिन्न है । इस रजकण के स्पर्शमात्र से मुक्ति सिद्ध है, बल्कि मुक्ति की भी मुक्ति सम्भव है ।