जिनके उर में घनस्याम बसे, तिन ध्यान महान कियो न कियो। [1]
वृन्दावन धाम कियो जिनने, तिन औरहू धाम कियो न कियो॥ [2]
जमुना जल पान कियो जिनने, तिन औरहु पान कियो न कियो। [3]
रसना जिनकी हरि नाम न ले, तिन मानुस जन्म लियो न लियो॥ [4]
- ब्रज के सवैया
जिनके हृदय में घनश्याम बसे हैं, वह ध्यान करें या न करें, इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता। [1]
यदि वृंदावन धाम में चले गए, तो अन्य किसी धाम में जाने की आवश्यकता नहीं है। [2]
यदि यमुना जल पान कर लिया, तो और कोई पवित्र जल पान करने की आवश्यकता नहीं है। [3]
यदि हरि नाम ही न लिया, तो निस्संदेह धिक्कार है, ऐसा मानव जीवन पाकर भी व्यर्थ में गंवा दिया। [4]
वृन्दावन धाम कियो जिनने, तिन औरहू धाम कियो न कियो॥ [2]
जमुना जल पान कियो जिनने, तिन औरहु पान कियो न कियो। [3]
रसना जिनकी हरि नाम न ले, तिन मानुस जन्म लियो न लियो॥ [4]
- ब्रज के सवैया
जिनके हृदय में घनश्याम बसे हैं, वह ध्यान करें या न करें, इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता। [1]
यदि वृंदावन धाम में चले गए, तो अन्य किसी धाम में जाने की आवश्यकता नहीं है। [2]
यदि यमुना जल पान कर लिया, तो और कोई पवित्र जल पान करने की आवश्यकता नहीं है। [3]
यदि हरि नाम ही न लिया, तो निस्संदेह धिक्कार है, ऐसा मानव जीवन पाकर भी व्यर्थ में गंवा दिया। [4]

