(राग गौरी व कल्याण)
गिरधर सबही अंग को बाँको,
बाँकी चाल चलत गोकुल में छैल छबीलो काको [1]
बाँकी भौंह चरन गति बाँकी बाँको हृदय है ताको,
परमानन्द दास को ठाकुर कियो खोर ब्रज सांको [2]
- श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर (554)
श्री गिरिधर लाल श्री कृष्ण समस्त अंगों से बाँके हैं। उनकी चाल भी बाँकी है, वह श्री गोकुल की गलियों में बाँकी अदा से ही चलते हैं एवं छैल छबीले रसिया हैं । [1]
उनकी भौंहें तिरछी हैं, उनकी चाल बाँकी है, एवं हृदय से भी बाँके हैं। श्री परमानंददास कहते हैं, "उनके स्वामी श्री बाँके बिहारी ब्रज की समस्त गलियों के चहेते ठाकुर हैं!" [2]
गिरधर सबही अंग को बाँको,
बाँकी चाल चलत गोकुल में छैल छबीलो काको [1]
बाँकी भौंह चरन गति बाँकी बाँको हृदय है ताको,
परमानन्द दास को ठाकुर कियो खोर ब्रज सांको [2]
- श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर (554)
श्री गिरिधर लाल श्री कृष्ण समस्त अंगों से बाँके हैं। उनकी चाल भी बाँकी है, वह श्री गोकुल की गलियों में बाँकी अदा से ही चलते हैं एवं छैल छबीले रसिया हैं । [1]
उनकी भौंहें तिरछी हैं, उनकी चाल बाँकी है, एवं हृदय से भी बाँके हैं। श्री परमानंददास कहते हैं, "उनके स्वामी श्री बाँके बिहारी ब्रज की समस्त गलियों के चहेते ठाकुर हैं!" [2]

