तात मात त्रिय भ्रात सुत - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (40)

तात मात त्रिय भ्रात सुत - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (40)

तात मात त्रिय भ्रात सुत, और सकल परिवार।
नारायण अपनो वही, जाको हरिसों प्यार॥

- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (40)

चाहे पिता, माता, पत्नी, भाई-बंधु, पुत्र और समस्त परिवार ही क्यों न हों; पर वास्तव में अपना वही है, जिसे श्रीहरि से अनन्य प्रेम है।