(राग मल्हार व विहागरौ)
हिंडोरे माई झूलत लाल विहारी ।
संग झूलति वृषभानु नन्दिनी, प्रानत हूँ ते प्यारी ।। [1]
नीलाम्बर पीताम्बर की छवि, घन दामिनि मनुहारी ।
बलि-बलि जाय जुगल चन्द पर कृष्णदास बलिहारी ।। [2]
- श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (1040)
प्राणों से भी प्यारी वृषभानुनन्दिनी के साथ श्रीकृष्ण झूला झूल रहे हैं। [1]
हवा के वेग से फहराता हुआ श्रीराधा का नीलाम्बर और श्रीकृष्ण का पीताम्बर ऐसा लग रहा है मानो काले बादल में बिजली कड़क रही हो। श्री कृष्ण दास इस अद्बुत युगल जोड़ी पर बारम्बार बलिहार जा रहे हैं । [2]

