प्राप्ति में संसै नहीं, तन मन वचननि एक।
कुंजविहारिणी लाडिली, यही हमारी टेक॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (329)
तन, मन और वाणी से हमारा यह अटूट संकल्प है कि हम कुंज-बिहारिणी श्री लाड़िली जू (श्री राधा) को निश्चित ही प्राप्त करेंगे।
कुंजविहारिणी लाडिली, यही हमारी टेक॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (329)
तन, मन और वाणी से हमारा यह अटूट संकल्प है कि हम कुंज-बिहारिणी श्री लाड़िली जू (श्री राधा) को निश्चित ही प्राप्त करेंगे।

