वेदनाग क्रोश भूमिं स्वधाम्न: श्री हरि: स्वयम  - गर्ग संहिता, गोलोक खंड (3.33)

वेदनाग क्रोश भूमिं स्वधाम्न: श्री हरि: स्वयम - गर्ग संहिता, गोलोक खंड (3.33)

वेदनाग क्रोश भूमिं स्वधाम्न: श्री हरि: स्वयम ।
गोवर्द्धनं च यमुनां प्रेषयामास भू परि ।।

- गर्ग संहिता, गोलोक खंड (3.33)

श्री नारद जी कहते हैं कि भगवान श्री हरि ने चौरासी कोस ब्रज मंडल, गोवर्द्धन, एवं श्री यमुना जी को स्वयं गोलोक धाम से प्रकट रूप में भेजा है ।