वन्दावन कौ जस सुनत, जिनकै नाहिं हुलास।
तिनको परस न कीजिये, तजि ध्रुव तिनको पास॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (85)
श्री ध्रुवदास जी कहते हैं— श्री वृन्दावन की महिमा सुनकर जिनके हृदय में उत्साह और हर्ष उत्पन्न नहीं होता, उनका स्पर्श भी नहीं करना चाहिए; उनके संग का त्याग ही कर देना चाहिए।
तिनको परस न कीजिये, तजि ध्रुव तिनको पास॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (85)
श्री ध्रुवदास जी कहते हैं— श्री वृन्दावन की महिमा सुनकर जिनके हृदय में उत्साह और हर्ष उत्पन्न नहीं होता, उनका स्पर्श भी नहीं करना चाहिए; उनके संग का त्याग ही कर देना चाहिए।

