(राग षट व आसावारी )
स्यामा स्याम वलैया लैहौं ।
दुःख सुख तजि वृंदावन रहि हौं ।। [1]
अति पावन जमुना जल न्हैहौं ।
व्रजवासिनीकी जूँठनि खैहौं ।। [2]
वंशीवटकी छैयाँ रहैहौं ।
कुंजनि छाँड़ि अनत नहिं जैहौं ।। [3]
श्रीराधा रूसी वेगि मनैहौं ।
क्रीड़ा रस पीवत न अघेहौं ।। [4]
सुंदर नाम स्याम गुन गैंहौं ।
व्यास कहत रासहिं मन दैहौं ।। [5]
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (453)
श्यामा श्याम पर बलिहार जाइए, सुख एवं दुःख त्याग कर वृंदावन में रहिए । [1]
अति पावन यमुना जल में स्नान करिए, ब्रज वासियों की झूटन को ग्रहण करिए । [2]
वंशीवट की शीतल छैयाँ में रहिए, एवं वृंदावन की कुंजों को छोड़ कर कहीं मत जाइए । [3]
श्री राधा जू जब श्याम सुंदर से मान करती हैं तो उनको मनाइए एवं नित्य विहार क्रीड़ा रस को नित्य ही पान करते हुए कभी प्यास बुझने न दीजिए । [4]
श्री श्याम सुंदर के सुंदर नामों का गुणगान करिए एवं श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं की रास रस में मन को लगाइए । [5]
स्यामा स्याम वलैया लैहौं ।
दुःख सुख तजि वृंदावन रहि हौं ।। [1]
अति पावन जमुना जल न्हैहौं ।
व्रजवासिनीकी जूँठनि खैहौं ।। [2]
वंशीवटकी छैयाँ रहैहौं ।
कुंजनि छाँड़ि अनत नहिं जैहौं ।। [3]
श्रीराधा रूसी वेगि मनैहौं ।
क्रीड़ा रस पीवत न अघेहौं ।। [4]
सुंदर नाम स्याम गुन गैंहौं ।
व्यास कहत रासहिं मन दैहौं ।। [5]
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (453)
श्यामा श्याम पर बलिहार जाइए, सुख एवं दुःख त्याग कर वृंदावन में रहिए । [1]
अति पावन यमुना जल में स्नान करिए, ब्रज वासियों की झूटन को ग्रहण करिए । [2]
वंशीवट की शीतल छैयाँ में रहिए, एवं वृंदावन की कुंजों को छोड़ कर कहीं मत जाइए । [3]
श्री राधा जू जब श्याम सुंदर से मान करती हैं तो उनको मनाइए एवं नित्य विहार क्रीड़ा रस को नित्य ही पान करते हुए कभी प्यास बुझने न दीजिए । [4]
श्री श्याम सुंदर के सुंदर नामों का गुणगान करिए एवं श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं की रास रस में मन को लगाइए । [5]

