श्रीवृन्दावन जीवना इह महाभागा यदा जीवना दप्येते वत वल्लभा नहि तथा वृन्दाटवी दुर्लभा।
तादृक्सत्तम सत्कृपात उदिता वृन्दावने चेन्महा प्रीति स्तर्ह्यचिरेण सापि सुलभा वृन्दावनाधीश्वरी।।
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (13.6)
जिनको श्रीवृन्दावन ही प्राण समान है, ऐसे महा भाग्यवान् पुरुष जिनको प्राणों से भी अत्यन्त प्यारे हैं, उन्हें श्रीवृन्दावन की प्राप्ति कभी दुर्लभ नहीं है, इस प्रकार के महापुरुषों की कृपा से यदि श्रीवृन्दावन में महा प्रीति उत्पन्न हो आवे, तो शीघ्र ही श्रीवृन्दावनाधीश्वरी श्रीराधा की प्राप्ति हो जाती है।
तादृक्सत्तम सत्कृपात उदिता वृन्दावने चेन्महा प्रीति स्तर्ह्यचिरेण सापि सुलभा वृन्दावनाधीश्वरी।।
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (13.6)
जिनको श्रीवृन्दावन ही प्राण समान है, ऐसे महा भाग्यवान् पुरुष जिनको प्राणों से भी अत्यन्त प्यारे हैं, उन्हें श्रीवृन्दावन की प्राप्ति कभी दुर्लभ नहीं है, इस प्रकार के महापुरुषों की कृपा से यदि श्रीवृन्दावन में महा प्रीति उत्पन्न हो आवे, तो शीघ्र ही श्रीवृन्दावनाधीश्वरी श्रीराधा की प्राप्ति हो जाती है।

