बिहारीजी से बिहारीजी, स्वामी जी से स्वामी जी।
औरनि ते आँखिं मूँदि, इन्हिं निहारी जी॥
- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (37)
श्री बिहारीजी [श्री बाँके बिहारी] के समान केवल श्री बिहारीजी ही हैं, और श्री स्वामीजी [ललिता-अवतार श्री हरिदास] के समान केवल श्री स्वामीजी ही हैं; अतः अन्य सब से आँखें मूँदकर इन्हीं को निहारना चाहिए।
औरनि ते आँखिं मूँदि, इन्हिं निहारी जी॥
- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (37)
श्री बिहारीजी [श्री बाँके बिहारी] के समान केवल श्री बिहारीजी ही हैं, और श्री स्वामीजी [ललिता-अवतार श्री हरिदास] के समान केवल श्री स्वामीजी ही हैं; अतः अन्य सब से आँखें मूँदकर इन्हीं को निहारना चाहिए।

