कहि राधा किन हार चोरायो - श्री सूरदास, सूर सागर

कहि राधा किन हार चोरायो - श्री सूरदास, सूर सागर

(राग धनाश्री) 
कहि राधा किन हार चोरायो । 
व्रज युवतिनि सबहिन मैं जानति घर घर लेले नाम बतायो ।। [1] 
श्यामा कामा चतुरा नवला प्रमुदा सुमदा नारी ।
सुखमा शीला अवधा नंदा वृंदा यमुना सारि ।। [2]
कमला तारा विमला चंदा चंद्रावलि सुकुमारि । 
अमला अबला कुंजा मुकता हीरा लीला प्यारि ।। [3]
सुमना बहुला चंपा जुहिला ज्ञाना भाना भाऊँ । 
प्रेमा दामा रूपा हंसा रंगा हरषा जाऊँ ।। [4]
दिवा रंभा कृष्णा ध्याना मैना नैना रूप । 
रत्ना कुसमा मोहा करुना ललना लोभा अनूप ।। [5]
इतनिन में कहि कौने लीन्हौं ताके नाम बताउँ ।
सूरश्याम हैं चोर तिहारे मैं जानति सव दाउँ ।। [6]
- श्री सूरदास, सूर सागर

चतुर सखियाँ श्री राधा से पूछती हैं: हे राधा, आपका मोतियों का हार किसने चुराया है? मैं नाम से सभी साखियों को जानती हूं, सुनो: - श्यामा, कामा, चतुरा, नवला, प्रमुदा, सुमदा, सुखमा, शीला, अवधा, नंदा, वृंदा, यमुना, कमला, तारा, बिमला, चंदा, चंद्रावली, अमला, अबला, कुंजा, मुक्ता, हीरा, लीला, सुमना, बहुला, चम्पा, जुहिला, ज्ञाना, भाना, प्रेमा, दामा, रूपा, हंसा, रंगा, हरषा, दिवा, रंभा, कृष्णा, ध्याना, मैना, नैना, रत्ना, कुसुमा, मोहा, करुणा, ललना, लोभा और अनुपा। आप इन सब में से मुझे अपना हार चुराने वाली का नाम बताइए। सखी पुने: बोलीं, हे प्यारी, मैं तुम्हारे सारे दाँव जानती हूँ! अगर कोई भी इसे चुरा ले गया है, तो यह अवश्य ही सूरदास के स्वामी श्याम सुंदर हैं हैं !