निम्बार्क परंपरा के अंतर्गत जुगल घाट पर श्री युगल किशोर मंदिर स्थित है।
श्रीमद्भागवत के अनुसार, जब गोपियों के मध्य से श्री कृष्ण अंतर्ध्यान हो गए, तब पुनः गोपियों को रमणरेती में श्री कृष्ण के दर्शन हुए। जिसके पश्चात् श्री राधा कृष्ण जुगल घाट पर आये और यहाँ स्नान किया। इस लीला के पश्चात् यहाँ के ठाकुर जी का नाम श्री युगल किशोर हुआ।
मंदिर में एक और युगल विग्रह विराजमान हैं जिनका नाम श्री जुगल बिहारी है। श्री जुगल बिहारी वर्ष में एक बार मंदिर से बाहर पालकी में विहार करने के लिए आते है।
यह मंदिर 300 से 400 वर्ष पुराना है।
स्थान:
श्री युगल किशोर मंदिर वृन्दावन के जुगल घाट के समीप, परिक्रमा मार्ग से श्री राधावल्लभ मंदिर के रास्ते पर स्थित है।
श्रीमद्भागवत के अनुसार, जब गोपियों के मध्य से श्री कृष्ण अंतर्ध्यान हो गए, तब पुनः गोपियों को रमणरेती में श्री कृष्ण के दर्शन हुए। जिसके पश्चात् श्री राधा कृष्ण जुगल घाट पर आये और यहाँ स्नान किया। इस लीला के पश्चात् यहाँ के ठाकुर जी का नाम श्री युगल किशोर हुआ।
मंदिर में एक और युगल विग्रह विराजमान हैं जिनका नाम श्री जुगल बिहारी है। श्री जुगल बिहारी वर्ष में एक बार मंदिर से बाहर पालकी में विहार करने के लिए आते है।
यह मंदिर 300 से 400 वर्ष पुराना है।
स्थान:
श्री युगल किशोर मंदिर वृन्दावन के जुगल घाट के समीप, परिक्रमा मार्ग से श्री राधावल्लभ मंदिर के रास्ते पर स्थित है।

