चलु मन वृन्दावन गोविंद राधे ।
जा पै सुख बैकुंठ लुटा दे ।।
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविन्द गीत (5925)
हे मन, वृंदावन की ओर चल, जिस दुर्लभ वृंदावन रस के आगे वैकुंठ धाम का रस भी न्योछावर है ।
जा पै सुख बैकुंठ लुटा दे ।।
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविन्द गीत (5925)
हे मन, वृंदावन की ओर चल, जिस दुर्लभ वृंदावन रस के आगे वैकुंठ धाम का रस भी न्योछावर है ।

