सुंदरता की हद मुरलीधर - श्री हित वृंदावन दास जी

सुंदरता की हद मुरलीधर - श्री हित वृंदावन दास जी

सुंदरता की हद मुरलीधर, बेहद छबि श्रीराधा।
गावैं बपु अनंत धरि सारद, तऊँ न पूजै साधा॥
- श्री हित वृंदावन दास जी

सुंदरता की पराकाष्ठा श्री श्यामसुन्दर हैं, और ऐसी अद्भुत, अगाध छवि जिसकी कोई सीमा नहीं, वही श्री राधा हैं। सरस्वती भी अनंत रूप धारण करके इस दिव्य युगल की अनुपम सुंदरता का गान करती है, परन्तु उसकी लालसा समाप्त नहीं होती।