भुवन चतुर्दश आदि दै, ह्वै है सबकौ नास।
इक छत वृन्दाविपिन घन, सुख कौ सहज निवास॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (86)
चौदह भुवन पर्यन्त सब नाशवान हैं; परंतु यह एक मात्र श्रीवृन्दावन धाम सहज-सुख-धाम है, अविनाशी है।
इक छत वृन्दाविपिन घन, सुख कौ सहज निवास॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (86)
चौदह भुवन पर्यन्त सब नाशवान हैं; परंतु यह एक मात्र श्रीवृन्दावन धाम सहज-सुख-धाम है, अविनाशी है।

