जपमाला छापें तिलक, सरै न एकौ कामु।
मन कांचे नाचै वृथा, सांचे राचै रामु॥
- श्रीमहाकवी बिहारी लाल, बिहारी सतसई
बिहारीलाल जी कहते हैं कि नाम-जप की माला फेरने या माथे पर तिलक लगाने से कोई भी कार्य सिद्ध नहीं होता। यदि मन कच्चा है, तो वह व्यर्थ ही सांसारिक विषयों में नाचता रहेगा। सच्चा और दृढ़ मन ही राम में रम सकता है।
मन कांचे नाचै वृथा, सांचे राचै रामु॥
- श्रीमहाकवी बिहारी लाल, बिहारी सतसई
बिहारीलाल जी कहते हैं कि नाम-जप की माला फेरने या माथे पर तिलक लगाने से कोई भी कार्य सिद्ध नहीं होता। यदि मन कच्चा है, तो वह व्यर्थ ही सांसारिक विषयों में नाचता रहेगा। सच्चा और दृढ़ मन ही राम में रम सकता है।

