जाके दर्शन हेत नित, विह्वल रहत घनश्याम। तिनके चरनन में बसे, मेरो मन आठों याम॥ - ब्रज के दोहे जिनके दर्शन के लिए श्रीकृष्ण नित्य ही विकल रहते हैं, उन श्री राधारानी के चरणों में ही मेरा मन सदा लगा रहे—ऐसी मेरी कामना है।