कन्हैया को एक रोज़ रोकर पुकारा,
कहा उनसे जैसा हूँ अब हूँ तुम्हारा। [1]
वो बोले साधन किये तूने क्या है,
मैं बोला किसे तुमने साधन से तारा॥ [2]
वो बोले कि दुनिया में आकर किया कुछ,
मैं बोला कि अब भेजना मत दुबारा। [3]
वो बोले परेशां हूँ तेरी बहस से,
मैं बोला ये कहदो तू जीता मैं हारा॥ [4]
वो बोले कि ज़रिया तेरा क्या है मुझ तक,
मैं बोला कि दृग ‘बिन्दु’ का है सहारा। [5]
- श्री बिंदु जी, मोहन मोहिनी
एक दिन मैंने आँसुओं से श्री कृष्ण को पुकारा और कहा, "मैं चाहे अच्छा हूँ या बुरा, पर मैं केवल आपका हूँ।" [1]
श्री कृष्ण ने पूछा, "तुमने मुझे पाने के लिए कितनी साधना की है?" मैंने उत्तर दिया, "ऐसा कौन है जिसने साधना के बल पर आपको पाया हो?" [2]
श्री कृष्ण ने कहा, "इस संसार में आकर तुमने अब तक क्या अर्जित किया है?" मैंने विनती की, "अब मुझे इस संसार में दोबारा मत भेजना।" [3]
श्री कृष्ण बोले, "तुम्हारे तर्कों से मैं तंग आ गया हूँ।" मैंने कहा, "तो बस इतना कह दीजिए कि मैं जीत गया और आप हार गए।" [4]
श्री कृष्ण ने पूछा, "तुम मेरी कृपा कैसे प्राप्त करोगे?" मैंने (श्री बिंदु जी महाराज कहते हैं) कहा, "आपकी कृपा पाने का एक ही उपाय है – मैं आँसुओं के सहारे पुकारूँ, और मुझे कोई और मार्ग नहीं आता।" [5]
कहा उनसे जैसा हूँ अब हूँ तुम्हारा। [1]
वो बोले साधन किये तूने क्या है,
मैं बोला किसे तुमने साधन से तारा॥ [2]
वो बोले कि दुनिया में आकर किया कुछ,
मैं बोला कि अब भेजना मत दुबारा। [3]
वो बोले परेशां हूँ तेरी बहस से,
मैं बोला ये कहदो तू जीता मैं हारा॥ [4]
वो बोले कि ज़रिया तेरा क्या है मुझ तक,
मैं बोला कि दृग ‘बिन्दु’ का है सहारा। [5]
- श्री बिंदु जी, मोहन मोहिनी
एक दिन मैंने आँसुओं से श्री कृष्ण को पुकारा और कहा, "मैं चाहे अच्छा हूँ या बुरा, पर मैं केवल आपका हूँ।" [1]
श्री कृष्ण ने पूछा, "तुमने मुझे पाने के लिए कितनी साधना की है?" मैंने उत्तर दिया, "ऐसा कौन है जिसने साधना के बल पर आपको पाया हो?" [2]
श्री कृष्ण ने कहा, "इस संसार में आकर तुमने अब तक क्या अर्जित किया है?" मैंने विनती की, "अब मुझे इस संसार में दोबारा मत भेजना।" [3]
श्री कृष्ण बोले, "तुम्हारे तर्कों से मैं तंग आ गया हूँ।" मैंने कहा, "तो बस इतना कह दीजिए कि मैं जीत गया और आप हार गए।" [4]
श्री कृष्ण ने पूछा, "तुम मेरी कृपा कैसे प्राप्त करोगे?" मैंने (श्री बिंदु जी महाराज कहते हैं) कहा, "आपकी कृपा पाने का एक ही उपाय है – मैं आँसुओं के सहारे पुकारूँ, और मुझे कोई और मार्ग नहीं आता।" [5]

