महल हमारे गुदी परयौ है - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (53)

महल हमारे गुदी परयौ है - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (53)

महल हमारे गुदी परयौ है ।
हम भूलैं यह भूलैं नाहीं तन मन वचननि आनिं अरयौ है । [1]
छिन हीं छिन आनंद बढ़ावत गौर श्याम सुख हियें भरयौ है ।
श्री हरिदासी रसिक केली में ललित किशोरी कों प्राण करयौ है ।। [2]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (53)

श्री वृंदावन निकुंज महल मेरे मन के पीछे पड़ गया है, यदि किसी कारण वश मैं भूलना भी चाहूँ तो यह निज महल मेरे तन, मन एवं वचनों के आगे सदा काल ही विराजमान रहता है । [1]

इसका प्रभाव है कि छिन छिन गौर श्याम का अत मधुर रस हृदय में भरा रहता है एवं आनंद का वर्धन होता रहता है । श्री ललित किशोरी देव जी कहते हैं कि महामाधुरी से भारी अत रसीली निज केली में स्वामीजी [श्री हरिदास] ने मुझे अपना प्राण बना लिया है । [2]