होरी रंग महल में खेलत हैं पिय प्यारी - श्री राधा प्रसाद देव जू

होरी रंग महल में खेलत हैं पिय प्यारी - श्री राधा प्रसाद देव जू

होरी रंग महल में खेलत हैं पिय प्यारी ।
ललिता भरि भरि देत उमेग सौं केसर रंग पिचकारी ।।[1]
कमल करनि भरि बूकाबंदन घालत जब सुकुमारी ।
मूँठ बचावत नवल छबीलौ श्रीराधा रसिक बिहारी ।। [2]

- श्री राधा प्रसाद देव जू

रंग-महल में श्री प्रियालाल होरी खेल रहे हैं। श्रीललिता जी केसरिया रंग को पिचकारियों में भर-भर कर बड़े उमंग से उन्हें दे रही हैं। [1]

प्रियाजी दोनों हाथों में बूका बंदन लेकर जब उसे प्रियतम पर फेंकती हैं, तो वे बड़ी अदा के साथ उसे बचा जाते हैं । [2]