(राग देवगंधार)
मेरी राधा प्रिय आधार ।
गौर - स्याम अभिराम छबीले सोभा अपरंपार ॥ [1]
सखिनि सहित निजु कुंजमहल में वृंदाविपिन बिहार।
सुंदर वर अति रसिक-सिरोमनि रूप निरखि बलिहार ॥ [2]
- श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी की वाणी, श्रृंगार रस के पद (34)
मेरी स्वामिनी श्री राधा प्रिय श्याम सुंदर का प्राण आधार है । इनकी गौर श्याम की छवि छबीली एवं अपरम्पार है । [1]
वृंदावन निकुंज महल में सखियों संग यह नित्य ही विहार परायण हैं । श्री रूप सखी जी कहती हैं कि श्री रसिक शिरोमणि स्वामी श्री हरिदास जी संग यह जोरी को निहार कर वह बलिहार जा रहे हैं । [2]
मेरी राधा प्रिय आधार ।
गौर - स्याम अभिराम छबीले सोभा अपरंपार ॥ [1]
सखिनि सहित निजु कुंजमहल में वृंदाविपिन बिहार।
सुंदर वर अति रसिक-सिरोमनि रूप निरखि बलिहार ॥ [2]
- श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी की वाणी, श्रृंगार रस के पद (34)
मेरी स्वामिनी श्री राधा प्रिय श्याम सुंदर का प्राण आधार है । इनकी गौर श्याम की छवि छबीली एवं अपरम्पार है । [1]
वृंदावन निकुंज महल में सखियों संग यह नित्य ही विहार परायण हैं । श्री रूप सखी जी कहती हैं कि श्री रसिक शिरोमणि स्वामी श्री हरिदास जी संग यह जोरी को निहार कर वह बलिहार जा रहे हैं । [2]

