देखौ माई सुंदर कुंज बनी - श्री हित कमल नैन जी की वाणी, अष्टायामी पदावली (20)

देखौ माई सुंदर कुंज बनी - श्री हित कमल नैन जी की वाणी, अष्टायामी पदावली (20)

देखौ माई ! सुंदर कुंज बनी ।
बैठे नवल नागरी नागर, छबि नहिं जात भनी ।। [1]
दादुर मोर पपीहा बोलत, बरसत घन सजनी ।
जै श्री कमल नैंन हित अति सचु पायौ, जागे सब रजनी ।। [2]

- श्री हित कमलनैन, श्री हित कमलनैन जी की वाणी, अष्टायामी पदावली (20)

हे सखी, देखो कितनी सुंदर कुंज बनी है । नवल नागरी और नागर वहाँ विराजमान हैं जिसकी अत्यंत सुंदर छवि का वर्णन करना सर्वथा असम्भव है । [1]

आज वृंदावन की कुंज में घने बादल बरस रहे हैं, एवं मेंढक, मोर एवं पपीहा मधुर मधुर धुन से गुंजार कर रहे हैं । श्री हित कमल नैन जी कहते हैं की आज समस्त सखियाँ युगल सेवा में ओतप्रोत हर्षोल्लास में भर पूर्ण रात्रि जागरण कर रही हैं एवं अत्यंत सुख का अनुभव कर रही हैं । [2]