किरपा ने कृपा करी - श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (42)

किरपा ने कृपा करी - श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (42)

किरपा ने कृपा करी, गयौ मूँड को भार।
श्रीवृंदावन में बसि रहौ, निरखौ नित्य विहार॥

- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (42)

साक्षात् कृपा ने भी ऐसी कृपा की कि अब समस्त मेरे मस्तक का समस्त सांसारिक बोझ और अनावश्यक चिंताओं का भार सदा के लिए उतर गया है। अब निश्चिंत होकर श्री वृन्दावन के पावन धाम में वास करना है और निरंतर प्रिया-प्रीतम के उस 'नित्य-विहार' का दर्शन एवं अनुभव करना है।