नारायण बिन बोध के, पण्डित पशु समान।
तासों अति मूरख भलो, जो सुमिरै भगवान॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (42)
श्री नारायण स्वामी जी कहते हैं कि बिना भक्ति के, एक विद्वान पंडित भी पशु के समान ही है। उस शुष्क ज्ञानी से तो वह मूर्ख व्यक्ति कहीं श्रेष्ठ है, जो बिना किसी ज्ञान के भी भगवान का भजन-स्मरण करता है।
तासों अति मूरख भलो, जो सुमिरै भगवान॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (42)
श्री नारायण स्वामी जी कहते हैं कि बिना भक्ति के, एक विद्वान पंडित भी पशु के समान ही है। उस शुष्क ज्ञानी से तो वह मूर्ख व्यक्ति कहीं श्रेष्ठ है, जो बिना किसी ज्ञान के भी भगवान का भजन-स्मरण करता है।

