(राग सोरठ)
हमारे तीरथ कौन करे।
हमारे तीरथ कौन करे।
घट में गंगा, घट में जमुना, कासी भटकत कौन फिरै ।। [1]
घट में बसी साँवरी सूरत, मूरत जम ते कौन डरै ।
भज ‘कृष्णदास’ श्री वल्लभ, विट्ठल सब कछु अर्थ सरै ।। [2]
- श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (1094)
हम अब कौन सा तीर्थ भ्रमण करें क्यूँकि यहाँ ब्रज में घट में गंगा, घट में यमुना इत्यादि का निवास है, अब काशी भी क्यूँ भटकते हुए फिरें? [1]
यहाँ ब्रज में घट घट में श्री कृष्ण की साँवरी सूरत बसी हुई है , अब यमराज से कौन डरे? श्री कृष्ण दास जी कहते हैं भगवान कृष्ण का भजन करने से परम तत्व की प्राप्ति होती है । [2]

