ब्रजरस रस ऐसा गोविंद राधे - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविन्द गीत (5955)

ब्रजरस रस ऐसा गोविंद राधे - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविन्द गीत (5955)

ब्रजरस रस ऐसा गोविंद राधे।
रस कहे और और और पिला दे।।
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविन्द गीत (5955)

ब्रज रस ऐसा है कि साक्षात रस भी कहता है मुझे और और और पीना है।