जुगल रूप की झलक उर, नैननिं रहै झलकाइ।
ऐसे सुख के रंग में, राखै मनहिं रँगाइ॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (91)
श्री श्यामा-श्याम के दिव्य अति-मधुर रूप की झलक नयनों में बनी रहे और उसी सुख के रंग में मन भी सदा रंगा रहे।
ऐसे सुख के रंग में, राखै मनहिं रँगाइ॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (91)
श्री श्यामा-श्याम के दिव्य अति-मधुर रूप की झलक नयनों में बनी रहे और उसी सुख के रंग में मन भी सदा रंगा रहे।

