मन भूल मत जैयो राधा रानी के चरण - श्री प्रेमी जी

मन भूल मत जैयो राधा रानी के चरण - श्री प्रेमी जी

मन भूल मत जैयो, राधा रानी के चरण।
राधा रानी के चरण, श्यामा प्यारी के चरण।
बाँके ठाकुर की बाँकी, ठकुरानी के चरण॥ [1]
वृषभानु की किशोरी, सुनी गैया हूँ ते भोरी।
प्रीति जान के हूँ थोरी, तोही राखेगी शरण॥ [2]
जाकुँ श्याम उर हेर, राधे-राधे-राधे टेर।
बांसुरी में बेर-बेर, करे नाम से रमण॥ [3]
भक्त ‘प्रेमीन’ बखानी, जाकी महिमा रसखानी।
मिले भीख मनमानी, कर प्यार से वरण॥ [4]
एरे मन मतवारे, छोड़ दुनिया के द्वारे।
राधा नाम के सहारे, सौंप जीवन मरण॥ [5]

- श्री प्रेमी जी

हे मन, श्री राधा रानी के चरण कमलों को मत भूलना। श्यामा प्यारी के दिव्य चरण कमल, और ठाकुर बांके बिहारी की मनमोहिनी ठकुरानी के चरण कमल। [1]

वृषभानु नंदिनी, जो अति भोली और दयालु हैं, गाय से भी अधिक सरल और उदार। तुम्हारे थोड़े से प्रेम को देखकर भी तुम्हें अपना आश्रय प्रदान करेंगी। हे मन, श्री राधा रानी के चरण कमलों को मत भूलना। [2]

श्री राधा सदैव श्री कृष्ण के हृदय में निवास करती हैं, और श्री कृष्ण अपनी मधुर बांसुरी से "राधे राधे" का नाम जपते हुए आनंदित रहते हैं। हे मन, श्री राधा रानी के चरण कमलों को मत भूलना। [3]

रसिक भक्तों के मुख से सदैव गायी जाती हैं उन चरण कमलों की अमृतमयी महिमा। जो भी वर चाहो वह मिल जाएगा, प्रेमपूर्वक उनकी सेवा करो। हे मन, श्री राधा रानी के चरण कमलों को मत भूलना। [4]

संसार के द्वार छोड़कर, व्यर्थ भटकना अब बंद कर, और पूरे विश्वास से श्री राधा नाम को थाम ले।अपना जीवन और मरण, दोनों उनके चरणों में अर्पित कर दे। हे मन, श्री राधा रानी के चरण कमलों को मत भूलना। [5]