मस्त रहे अपने मन में - ब्रज के दोहे

मस्त रहे अपने मन में - ब्रज के दोहे

मस्त रहे अपने मन में, कबहूँ नहि व्यापत लाभ न हानि।
नाम जपे मन ही मन में, मनमोहन सौ नित प्रीत निभानी॥

- ब्रज के दोहे

हम नित्य ही अपने में मस्त रहते हैं, न हमें लाभ से मतलब है और न ही हानि से। हम नाम जप मन ही मन करते हैं, हमें और किसी से कोई मतलब नहीं, हमें बस मनमोहन श्री कृष्ण से ही प्रीति निभानी है।