मस्त रहे अपने मन में, कबहूँ नहि व्यापत लाभ न हानि।
नाम जपे मन ही मन में, मनमोहन सौ नित प्रीत निभानी॥
- ब्रज के दोहे
हम नित्य ही अपने में मस्त रहते हैं, न हमें लाभ से मतलब है और न ही हानि से। हम नाम जप मन ही मन करते हैं, हमें और किसी से कोई मतलब नहीं, हमें बस मनमोहन श्री कृष्ण से ही प्रीति निभानी है।
नाम जपे मन ही मन में, मनमोहन सौ नित प्रीत निभानी॥
- ब्रज के दोहे
हम नित्य ही अपने में मस्त रहते हैं, न हमें लाभ से मतलब है और न ही हानि से। हम नाम जप मन ही मन करते हैं, हमें और किसी से कोई मतलब नहीं, हमें बस मनमोहन श्री कृष्ण से ही प्रीति निभानी है।

