जब दर पे तुम्हारे ही अधमों का ठिकाना है।
फिर मेरी किस्मत में ही क्यों रंज उठाना है॥ [1]
तारोगे तो तर लेंगे, छोड़ोगे तो बैठे हैं।
दरबार से अब हरगिज उठकर नहीं जाना है॥[2]
मेरी तो कोई करनी निभने की नहीं भगवन।
जैसे भी निभाओ अब तुमको ही निभाना है॥ [3]
फरियाद को सुनने में है कौन सिवा तुम्हारे।
गर तुम न सुनो मेरी फिर किसको सुनना है॥ [4]
दृग ‘बिन्दु’ की शक्लों में है ख्वाहिश इस दिल की।
जरिया तो है आँखों की आँसू का बहाना है॥ [5]
- श्री बिंदु जी, मोहन मोहिनी
हे श्री राधा कृष्ण, यदि आपके चरणों में ही अधम जीवों का कल्याण है फिर समस्त कष्टों को सहना मेरे भाग्य में ही क्यों है। [1]
यदि आप मुझे इस भव सागर से तार दे तो मैं तर जाऊँ, अन्यथा आपके ही भरोसे बैठा रहूँगा।
लेकिन अब मैं आपके चरण कमलों की शरण को छोड़ कर कभी कहीं नहीं जाऊंगा। [2]
हे भगवन, मैं किसी भी साधन से आप तक नहीं पहुँच सकता, एक मात्र आपकी कृपा से ही आप तक पहुँच सकता हूँ। [3]
मेरी प्रार्थना आपके सिवा और कौन सुननेवाला है, यदि आप ही मेरी प्रार्थना न सुनो तो और किसे सुनाऊँ। [4]
मेरी आँखों से झरते आंसुओं की इच्छा तो हृदय की है, इन आँखों से आपके दर्शन कर सकूं, आँसु तो एकमात्र बहाना है। [5]
फिर मेरी किस्मत में ही क्यों रंज उठाना है॥ [1]
तारोगे तो तर लेंगे, छोड़ोगे तो बैठे हैं।
दरबार से अब हरगिज उठकर नहीं जाना है॥[2]
मेरी तो कोई करनी निभने की नहीं भगवन।
जैसे भी निभाओ अब तुमको ही निभाना है॥ [3]
फरियाद को सुनने में है कौन सिवा तुम्हारे।
गर तुम न सुनो मेरी फिर किसको सुनना है॥ [4]
दृग ‘बिन्दु’ की शक्लों में है ख्वाहिश इस दिल की।
जरिया तो है आँखों की आँसू का बहाना है॥ [5]
- श्री बिंदु जी, मोहन मोहिनी
हे श्री राधा कृष्ण, यदि आपके चरणों में ही अधम जीवों का कल्याण है फिर समस्त कष्टों को सहना मेरे भाग्य में ही क्यों है। [1]
यदि आप मुझे इस भव सागर से तार दे तो मैं तर जाऊँ, अन्यथा आपके ही भरोसे बैठा रहूँगा।
लेकिन अब मैं आपके चरण कमलों की शरण को छोड़ कर कभी कहीं नहीं जाऊंगा। [2]
हे भगवन, मैं किसी भी साधन से आप तक नहीं पहुँच सकता, एक मात्र आपकी कृपा से ही आप तक पहुँच सकता हूँ। [3]
मेरी प्रार्थना आपके सिवा और कौन सुननेवाला है, यदि आप ही मेरी प्रार्थना न सुनो तो और किसे सुनाऊँ। [4]
मेरी आँखों से झरते आंसुओं की इच्छा तो हृदय की है, इन आँखों से आपके दर्शन कर सकूं, आँसु तो एकमात्र बहाना है। [5]

