प्रेम भरे हिय सौं करें, श्रवण मनन नित ध्यान।
सुनत नाम ‘राधा' तुरत, भूलें तन कौ भान॥
- श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (12.2)
हृदय में प्रेम भरकर श्री राधा की महिमा का नित्य ही श्रवण, मनन और ध्यान करें। ऐसा प्रेम उत्पन्न करें कि ‘श्री राधा’ नाम एक बार सुनते ही तन का भी भान न रहे।
सुनत नाम ‘राधा' तुरत, भूलें तन कौ भान॥
- श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (12.2)
हृदय में प्रेम भरकर श्री राधा की महिमा का नित्य ही श्रवण, मनन और ध्यान करें। ऐसा प्रेम उत्पन्न करें कि ‘श्री राधा’ नाम एक बार सुनते ही तन का भी भान न रहे।

