चित्तोद्वेगं विधायापि हरिर्यद्यत् - महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य, नवरत्नम् (8)

चित्तोद्वेगं विधायापि हरिर्यद्यत् - महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य, नवरत्नम् (8)

चित्तोद्वेगं विधायापि हरिर्यद्यत् करिष्यति।
तथैव तस्य लीलेति मत्वा चिंता द्रुतं त्यजेत् ।।
- महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य, नवरत्नम् (8)

यदि किसी कारण आपके चित्त में द्वेग उत्पन्न हो रहा है तो ऐसा मान कर कि श्रीहरि जो भी करेंगे वह अच्छा ही करेंगे, यह उनकी लीला मात्र है, चिंता को शीघ्र त्याग दें ।