(राग गौरी)
चलौ सखी कुंजबिहारी सौं चित दै
मिलि देखै उनकी भाँवती।
सुंदर सौं सुंदरि मिलि खेलत कैसैं धौं गाँवती॥ [1]
औचक आई परी सखी तहाँ पिय पै पाँई चंपाँवती।
श्रीहरिदास के स्वामी स्याम सौं
मिली पौंढ़ी तन मन राँवती॥ [2]
- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (104)
एक सखी अन्य अंतरंग सखी से कहती है, चलो हम श्री कुंजबिहारी [कृष्ण] से मिलने चलते हैं और उनकी प्यारी श्री राधिका को निहारते हैं । [देखें कि कैसे] सुंदर और सुंदरी एक संग मिलकर केली रस में उन्मत्त हैं, देखो वह कितना सुंदर गान कर रही हैं । [1]
सखी वहाँ अचानक आ गई, श्री प्यारी ज़ू ने कुंजबिहारी को सेवा का अवसर दिया है। श्री कृष्ण श्री राधा ज़ू की चरण सेवा कर रहे हैं।
श्री हरिदास के स्वामी श्याम सुंदर श्यामा ज़ू के संग पौंढ़े हुए हैं एवं तन और मन मिलाकर विहार कर रहे हैं । [2]
चलौ सखी कुंजबिहारी सौं चित दै
मिलि देखै उनकी भाँवती।
सुंदर सौं सुंदरि मिलि खेलत कैसैं धौं गाँवती॥ [1]
औचक आई परी सखी तहाँ पिय पै पाँई चंपाँवती।
श्रीहरिदास के स्वामी स्याम सौं
मिली पौंढ़ी तन मन राँवती॥ [2]
- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (104)
एक सखी अन्य अंतरंग सखी से कहती है, चलो हम श्री कुंजबिहारी [कृष्ण] से मिलने चलते हैं और उनकी प्यारी श्री राधिका को निहारते हैं । [देखें कि कैसे] सुंदर और सुंदरी एक संग मिलकर केली रस में उन्मत्त हैं, देखो वह कितना सुंदर गान कर रही हैं । [1]
सखी वहाँ अचानक आ गई, श्री प्यारी ज़ू ने कुंजबिहारी को सेवा का अवसर दिया है। श्री कृष्ण श्री राधा ज़ू की चरण सेवा कर रहे हैं।
श्री हरिदास के स्वामी श्याम सुंदर श्यामा ज़ू के संग पौंढ़े हुए हैं एवं तन और मन मिलाकर विहार कर रहे हैं । [2]

