लड़ैती कहै लड़ैतीय कहावै, ललित लड़ैती मो मन भावै।
अंग संग केलि लड़ैती देखै, छिन छिन बाढ़े सुख आलेखे॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (147)
हम सदा काल लड़ैतीजू [श्री राधा] का ही नाम-गुण गाते हैं और अन्य जनों से भी श्री राधा का ही नाम-गुण गवाते हैं। हमारे मन को एकमात्र श्री लाड़ली जू ही भाती हैं। हम श्री राधा के अंग-संग रहकर नित्य ही उनकी केली को निहारते हैं, और उन्हीं की कृपा से हमारा सुख क्षण-क्षण बढ़ता रहता है।

