(राग मलार)
हमारे धन स्यामाजू कौ नाम ।
जाकौं रटत निरंतर मोहन, नंदनंदन घनस्याम।। [1]
प्रतिदिन नव-नव महामाधुरी, बरसति आठौ जाम।
'गुनमंजरि' नवकुंज मिलावै, श्रीबृन्दावन धाम ।।[2]
- श्री गुणमंजरी दास, नवल रसिक पदावली (131)
हमारा धन एकमात्र श्री श्यामा [श्री राधे] ज़ू का नाम है जिसे नित्य निरंतर श्री नंद नंदन घनश्याम [श्री कृष्ण] रटते हैं । [1]
श्री गुणमंजरी कहती हैं कि श्री राधा नाम की कृपा से नव निकुंज श्री वृंदावन का वास सम्भव होता है जहां प्रतिदिन आठों याम नव नव महा माधुरी बरसती रहती है । [2]
हमारे धन स्यामाजू कौ नाम ।
जाकौं रटत निरंतर मोहन, नंदनंदन घनस्याम।। [1]
प्रतिदिन नव-नव महामाधुरी, बरसति आठौ जाम।
'गुनमंजरि' नवकुंज मिलावै, श्रीबृन्दावन धाम ।।[2]
- श्री गुणमंजरी दास, नवल रसिक पदावली (131)
हमारा धन एकमात्र श्री श्यामा [श्री राधे] ज़ू का नाम है जिसे नित्य निरंतर श्री नंद नंदन घनश्याम [श्री कृष्ण] रटते हैं । [1]
श्री गुणमंजरी कहती हैं कि श्री राधा नाम की कृपा से नव निकुंज श्री वृंदावन का वास सम्भव होता है जहां प्रतिदिन आठों याम नव नव महा माधुरी बरसती रहती है । [2]

