बन्यो माई पगा श्याम सिर नीको - श्री हरिराय जी

बन्यो माई पगा श्याम सिर नीको - श्री हरिराय जी

(राग सारंग)
बन्यो माई पगा श्याम सिर नीको ।
धोती ओर उपरेना ओढ़े ओर गहेनो मोती को ।।[1]
अंग अरगजा कमल हाथ में लीने मिल्यो भावतो जीको ।
नेन चकोर चंद मुख निरखत 'रसिक' प्रीतम सबहीको ।।[2]
- श्री हरिराय जी

हे सखी, आज श्याम सुंदर ने सुंदर पगड़ी धारण करी है । उन्होंने सुंदर धोती और उपरेना को ओढ़ रखा है एवं मोती के सुंदर गहने धारण किए हुए हैं । [1]

श्री श्याम सुंदर के अंगों में चंदन का लेप लगा है एवं हाथों में सुंदर कमल धारण किया हुआ है जिसे निहार कर हृदय में अत्यंत प्रसन्नता हो रही है । श्री हरिराय जी कहते हैं कि हमारी आँखें उस चकोर पक्षी की भाँति होनी चाहिए जो नित्य ही चंद्रमा को टक टकी लगाकर देखता रहता है क्यूँकि वह [श्याम सुंदर] पर पुरुष एवं सभी के प्रीतम हैं । [2]